Monday, 10 September 2018

क्योटो प्रोटोकॉल (Kyoto Protocol)

क्योटो प्रोटोकॉल का उद्देश्य 

कार्बन डाई ऑक्साइड के वातावरण में उत्सर्जन के फलस्वरूप भू-मंडल के तापमान में निरंतर वृद्धि हो रही है जिस कारण से जलवायु में परिवर्तन हो रहा है इस जलवायु परिवर्तन को रोक के लिए एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर करना था। ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन से जलवायु में हो रहे परिवर्तन पर ये तीसरा सम्मेलन था। इसके पहले भी दो सम्मेलन- पहला 1995 में बर्लिन में तथा दूसरा 1996 में जिनेवा में आयोजित हुए थे, लेकिन इसमें उत्सर्जन की मात्रा पर रोक के लिए किसी ठोस नतीजे पर सहमति नहीं हो सकी थी। लेकिन  इस जलवायु परिवर्तन सम्मेलन का लक्ष्य जलवायु परिवर्तन के के लिए ज़िम्मेदार कारकों पर नियंत्रण कर विश्व के पर्यावरण में गुणात्मक सुधार लाना था। इस सम्मेलन में काफ़ी मतभेदों के बावजूद औद्योगिक देश अन्ततः ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन पर 5 प्रतिशत से 2 प्रतिशत तक कमी लाने पर सहमत हो गये
Kyoto Protocol
Kyoto Protocol
                                                                                             इस क्योटों समझौते के तहत ग्रीन हाउस गैसों के विस्तार में यूरोपीय संघों 8 प्रतिशत, अमेरिका 7 प्रतिशत, जापान 6 प्रतिशत, कनाडा 3 प्रतिशत कटौती करने पर सहमत हुए। 20 अन्य औद्योगिक देशों ने भी कटौती करने की सहमति व्यक्त की है। अनेक अन्तर्विरोधी एवं मतभेदों के बावजूद सम्मेलन का एक समझौते पर पहुंचना महत्त्वपूर्ण उपलब्धि रही। 11 दिसम्बर, 1997 को क्योटों समझौते पर हस्ताक्षर हुए। इस समझौते में ग्रीन हाउस प्रभाव के लिए नाइट्रस ऑक्साइड, हाइड्रोफ्लोरो कार्बन, परफ्लोरो कार्बन एवं सल्फर हेक्सा फलोराइड का ज़िम्मेदार माना गया है। 

                                                                                              इस समझौते के तहत विकासाशील देशों पर कोई उत्सर्जन प्रतिबन्ध लागू नहीं किया गया। इस समझौते के दौरान ग्रीन हाउस प्रभाव से सर्वाधिक प्रभावित होने वाले राष्ट्र मारीशस, मालदीव, हवाई द्वीप आदि ने सन 2005 तक ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में 20 प्रतिशत तक की कटौती की मांग की। इस समझौते में यह व्यवस्था की गई कि जो देश समझौते का उल्लंघन करेगा वो जुर्माने से दण्डित होगा तथा जुर्माने की राशि को स्वच्छ विकास कोष में जमा किया जायेगा। इस कोष की स्थापना का प्रस्ताव ब्राजील ने किया था।

क्योटो प्रोटोकॉल(KYOTO PROTOCAL):
  • क्योटो प्रोटोकॉल एक अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण संधि है जिसे संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में तय किया गया था। इसी भू-मंडलीय तापमान में वृद्धि खतरों पर जापान के क्योटो शहर में 1 दिसम्बर से 10 दिसम्बर, 1997 तक जलवायु परिवर्तन पर एक अन्तराष्ट्रीय सम्मेलन हुआ। इस जलवायु परिवर्तन को रोक के लिए एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर हुआ। जिसे क्योटो प्रोटोकॉल के नाम से जाना जाता है। 
  • इस प्रोटोकॉल का उद्देश्य है, वायुमंडल में ग्रीनहॉउस गैस का घनत्व ऐसे मात्रा पर स्थिर रखना जिससे मनुष्य द्वारा जलवायु में कोई हानिकारक रुकावट उत्पन्न न हो.
  • क्योटो प्रोटोकोल के अनुसार "औद्योगिक देश द्वारा उत्पन्न चार ग्रीनहॉउस गैसों (कार्बन डाइऑक्साइड, मिथेन, नाइट्रस ऑक्साइड, सल्फर हेक्साफ्लोराइड) में कानूनी तौर पर कटौती करना आवश्यक है.
  • इस समझौते पर लगभग 200 देशों ने अपनी सहमति प्रकट की है जिसकी सहायता से विश्व के बढ़ते तापमान को एक निर्धारित स्तर पर रोका जा सके.
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