Tuesday, 18 September 2018

वायु प्रदूषण (AIR POLLUTION)

वायु प्रदूषण (AIR POLLUTION):

वायु सभी मनुष्यों, जीवों एवं वनस्पतियों के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसके महत्त्व का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि मनुष्य भोजन के बिना हफ्तों तक, जल के बिना कुछ दिनों तक ही जीवित रह सकता है, किन्तु वायु के बिना उसका जीवित रहना असम्भव है। मनुष्य दिन भर में जो कुछ लेता है उसका 80 प्रतिशत भाग वायु है। जैसा कि हमको पता है कि मनुष्य प्रतिदिन 22000 बार सांस लेता है। इस प्रकार प्रत्येक दिन में वह 16 किलोग्राम या 35 गैलन वायु ग्रहण करता है। वायु विभिन्न गैसों का मिश्रण है जिसमें नाइट्रोजन की मात्रा सर्वाधिक 78 प्रतिशत होती है जबकि 21 प्रतिशत ऑक्सीजन तथा 0.03 प्रतिशत कार्बन डाइ ऑक्साइड पाया जाता है तथा शेष 0.97 प्रतिशत में हाइड्रोजन, हीलियम, आर्गन, निऑन, क्रिप्टन, जेनान, ओज़ोन तथा जल वाष्प होती है। वायु में विभिन्न गैसों की उपरोक्त मात्रा उसे संतुलित बनाए रखती है। इसमें जरा-सा भी अन्तर आने पर वह असंतुलित हो जाती है और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित होती है। श्वसन के लिए ऑक्सीजन ज़रूरी है। जब कभी वायु में कार्बन डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन के ऑक्साइडों की वृद्धि हो जाती है, तो ऐसी वायु को प्रदूषित वायु तथा इस प्रकार के प्रदूषण को वायु प्रदूषण कहते हैं। 
वायु प्रदूषण (AIR POLLUTION)
वायु प्रदूषण (AIR POLLUTION)
                                                                         दूसरे शब्दों में, प्राकृतिक तथा मानव जनित स्रोतो से उत्पन्न बाहरी तत्वों के में वायु मिश्रण के कारण वायु असन्तुलित दशा को वायु प्रदूषण कहते हैं। तथा जिन कारकों से वायु प्रदूषित होती है उन्हें वायु प्रदूषक कहते है। इस तरह असंतुलित वायु की गुणवत्ता मे हृास हो जाता है और यह जीव-जंतुओ और पादपों के लिए हानिकारक हो जाती है।

वायु प्रदूषण के स्रोत:

वायु प्रदूषण के स्रोतों को दो भागों में बांटा जा सकता है-
  • प्राकृतिक स्रोत
  • मानवीय स्रोत
प्राकृतिक स्रोत: प्राकृतिक स्रोतों से उत्पन्न वायु को प्रदूषित करने वाले प्रदूषकों को निम्न वर्गों में विभाजित किया जा सकता है-
  • आंधी, तूफान के समय उड़ती धूल
  • वनों में लगी आग से उत्पन्न धुआं एवं कार्बन डाई ऑक्साइड
  • दलदल एवं अनूपो में अपघटित होने वाले पदार्थों से निकलने वाली मीथेन गैस
  • बैक्टीरिया से मिर्मुक्त कार्बन डाई ऑक्साइड
  • कवक से उत्पन्न जीवाणु एवं वायरस आदि
  • फूलों के परागकण से निर्मुक्त कार्बन डाईऑक्साइड 
  • धूमकेतु, क्षुद्र ग्रह तथा उल्काओं आदि के पृथ्वी से टकराने के कारण उत्पन्न कास्मिक धूल 
मानवीय स्रोत: मानव जनित प्रदूषक हैं-
  • कार्बन डाई ऑक्साइड
  • कार्बन मानो ऑक्साइड
  • सल्फर के ऑक्साइड
  • नाइट्रोजन के ऑक्साइड
  • क्लोरीन
  • सीसा
  • अमोनिया
  • कैडमियम
  • बेंजीपाइस
  • हाइड्रोकार्बन
  • धूल

मानवीय कारणो से उत्पन्न वायु प्रदूषण:

आज के जीवन की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। ऊर्जा के बिना वर्तमान के क्रिया कलाप सम्भव नहीं है। खाना पकाने से लेकर ईंट, सीमेंट आदि के निर्माण मे ऊर्जा की ज़रूरत होती है। वाहनों एवं मशीनों आदि के चालन में भी ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यह ऊर्जा विभिन्न प्रकार के ईंधनों के दहन से प्राप्त होती है।                                                          
                                                                घरेलू कार्यों के लिए जो ऊर्जा प्रयोग की जाती है वह कोयले, लकड़ी, कुकिंग गैस, उपलों, मिट्टी के तेल आदि से प्राप्त होती है। इन ईंधनों के दहन से कार्बन डाई ऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड आदि गैसें उत्पन्न होतीं हैं तथा ईंधनों के अपूर्ण दहन से कई प्रकार के हाइड्रोकार्बन्स एवं साइक्लिक पाइरिन यौगिक उत्पन्न होते है। इस प्रकार के दहन से वायुमण्डल में दो प्रकार से प्रभाव पड़ता है। एक तो यह अनेक हानिकारक गैसें वायु में मिलकर उसे प्रदूषित करती हैं तथा दूसरी तरफ वायु में मौजूद ऑक्सीजन की मात्रा मे कमी आती है, जो कि जीवन के लिए खतरनाक है। देश की कुल ऊर्जा का आधा भाग केवल रसोई घरों में खर्च होता है तथा देश के कुल प्रदूषण का 123 भाग केवल रसोई घरों से उत्पन्न होता है। 
                                                        वायु प्रदूषण के लिए वाहन भी कम उत्तरदायी नहीं हैं। बसों, कारो, ट्रकों, मोटर साइकिलों, स्कूटर, डीज़ल, रेलों आदि सभी में ईंधन के लिए पेट्रोल अथवा डीज़ल का प्रयोग किया जाता हैं। इनसे भारी मात्रा में दम घोंटने वाला काला धुआं निकलता है, जो वायु को प्रदूषित करता है। डीज़ल वाहनों से जो धुआं निकलता है उनमें हाइड्रोकार्बन, नाइट्रोजन एवं सल्फर के ऑक्साइड तथा सूक्ष्म कार्बनमयी कणिकाएं मौजूद रहती हैं।
                                                                                       पेट्रोल चलित वाहनो के धुएं में कार्बन मोनो ऑक्साइड व लेड मौजूद होते हैं। लेड एक वायु प्रदूषक पदार्थ है। ज्ञातव्य है कि डीज़ल चालित वाहनों की अपेक्षा पेट्रोल चालित वाहनों से प्रदूषण अधिक होता है। एक अनुमान के अनुसार, एक मोटरगाड़ी एक मिनट में इतनी अधिक मात्रा में ऑक्सीजन खर्च करती है जितनी कि 1135 व्यक्ति सांस लेने में खर्च करते हैं। 
                                                                                        डीज़ल एवं पेट्रोल चालित वाहनों में होने वाले दहन से नाइट्रोजन ऑक्साइड एवं नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड भी उत्पन्न होती है जो सूर्य के प्रकाश में हाइड्रोकार्बन से क्रिया करके रासयनिक धूम कुहरे को जन्म देते है। यह रासायनिक धूम कोहरा मानव के लिए बहुत खतरनाक है। सन् 1952 में पांच दिन तक लन्दन शहर रासायनिक धूम कुहरे से घिरा रहा, जिससे 4000 लोग मौत के शिकार हो गये एवं करोड़ों लोग हृदय रोग तथा ब्रोंकाइटिस के शिकार हो गये थे।
NOTE: दिल्ली विश्व का तीसरा और भारत का सर्वाधिक प्रदूषित शहर है। इसकी गम्भीरता को देखते हुए उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डॉ. ए. एस. आनन्द, न्यायमूर्ति श्री बी. एन. कृपाल और न्यायमूर्ति श्री ए. के. खरे की खण्डपीठ ने महेश चन्द्र मेहता की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए 22 सितम्बर 1988 को दिल्ली सरकार को यह निर्देश दिया कि सरकार लास एंजिल्स की तर्ज पर दिल्ली में ऑक्साइड स्तर को नियंत्रित करे।
                  भारत के अधिकांश ताप विद्युत गृहों में ईंधन के रूप में कोयला प्रयुक्त किया जाता है जिसके जलने से कार्बन डाई आक्साइड, धुआं तथा कुछ अन्य गैसें उत्पन्न होती हैं। भारतीय कोयले में अन्य देशों के कोयले की तुलना में 25 से 40 प्रतिशत तक फ्लाई ऐश होता है कोयले को जलाने पर अपशिष्ट के रूप में जो राख उत्पन्न होती है, वह बाहर फेंक दी जाती है। यह राख हवा के माध्यम से उड़कर वायुमण्डल को प्रदूषित करती है।

वायु प्रदूषण का प्रभाव (SIDE EFFECT OF AIR POLLUTION):

वैसे तो सभी प्रकार के प्रदूषणों का प्रभाव ख़राब होता है किन्तु वायु प्रदूषण का प्रभाव क्षेत्र अत्यधिक व्यापक है। अध्ययन की सुविधा की दृष्टि से वायु प्रदूषण के प्रभाव को निम्न प्रकार वर्गीकृत कर सकते है।
  • मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव
  • जीव-जन्तुओं पर प्रभाव
  • पेंड़-पौधों एवं वनस्पतियों पर प्रभाव
  • जलवायु और मौसम पर प्रभाव
  • दृश्यता का प्रभाव
  • इमारतो पर प्रभाव
  • अन्य प्रभाव

वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के उपाय(Measures To Control Air Pollution):

  • कल-कारखानों की चिमनियों की उंचाई अधिक होनी चाहिए।
  • रेल यातायात में कोयले अथवा डीज़ल के इंजनों के स्थान पर बिजली के इंजनों का उपयोग किया जाना चाहिये।
  • मोटर वाहनों का रख-रखाव ठीक रखा जाए। कारबुरेटर की सफाई कर कार्बन मोनो आक्साइड का उत्सर्जन कम किया जा सकता है तथा लेड रहित पेट्रोल का ईंधन के रूप में प्रयोग किया जाए।
  • पुराने वाहन के संचालन पर प्रतिबंध लगाया जाए क्योंकि उनसे वायु प्रदूषण ज्यादा होता है।
  • घरों में सौर ऊर्जा चालक कुकर का उपयोग किया जाए।
  • यूरो-1 और यूरो-2 मानकों का कड़ाई से पालन कराया जाए।
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