Saturday, 8 September 2018

पारिस्थितिकी असंतुलन के कारण (AFFECT ECOSYSTEM)

पारिस्थितिकी असंतुलन के कारण (DUE TO ECOLOGICAL IMBALANCE):

पारिस्थितिकी तंत्र सामान्यता संतुलित अवस्था में अपनी गतिविधियों को संचालित करता है। परन्तु परन्तु विभिन्न कारणों यथा वानोन्मूलन, प्रदुषण इत्यादि से पारिस्थितिकी असंतुलन की समस्या उत्पन्न हो जाती है। पारिस्थितिकी असंतुलन का मूलकारण वानोन्मूलन (लकड़ी काटना) है। वानोन्मूलन के कई कारण है। जो निम्नवत है। 
  • कागज की भारी मांग 
  • प्राकृतिक आपदाएं 
  • वनों का चरागाह में परिवर्तन 
  • वन भूमि का कृषि भूमि में परिवर्तन 
  • झूम कृषि 
  • वनों में आग लगना 
  • औधोगिक व व्यावसायिक उपयोग के लिए लड़की काटना 
  • नीति निर्धारण में सतत विकास की संकल्पना का अभाव 
  • शहरीकरण 
पारिस्थितिकी तंत्र
पारिस्थितिकी तंत्र 
भारत में पारिस्थितिक असंतुलन का मूल कारण वानोन्मूलन (लकड़ी काटना) है जबकि मरुस्थलीकरण, बाढ़, अकाल और वर्षा की परिवर्तनता इसके गौण कारणों में है वन्य जीन संरक्षण एवं पर्यावरण में व्याप्त प्रदूषण का निवारण पर्यावणीय संतुलन बनाये रखने में मदतगार होता है ध्यान देने योग्य बात है। कि जल प्रबधन, वन रोपण तथा वन्य जीव सुरक्षा से पारिस्थितिकी संतुलन सकारात्मक रूप से प्रभावित होता है।जबकि औधोगिक प्रबधन से पारिस्थितिकी संतुलन का कोई सबंध नहीं है वनो का काटना भी पर्यावणीय संतुलन को बनाए रखने में मदद नहीं करता।
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